छत्तीसगढ़ में पत्थलगड़ी बनाम विकासगड़ी

छत्तीसगढ़ में पत्थलगड़ी बनाम विकासगड़ी

सौजन्यः पी.टी.आई भाषा

रायपुर, 22 मई :भाषा: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव करीब आने के साथ आदिवासियों का ‘पत्थलगड़ी’ अभियान सरकार के लिये सिरदर्द बनता जा रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिये राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने ‘विकासगड़ी’ का नारा दिया है।


देश के कई आदिवासी बहुल इलाकों में 'पत्थलगड़ी' की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा रही है । इस परंपरा में गांव के श्मशान से लेकर गांव की सीमा तक पत्थर गाड़ कर उसके सहारे संदेश देने की कोशिश होती है । चुनावी साल में आदिवासियों द्वारा गांव में गैर आदिवासियों का प्रवेश वर्जित करने का 'पत्थलगड़ी' अभियान ऐसे समय में शुरु किया है जब रमन सिंह अपनी सरकार की 15 साल की उपलब्धियों को बताने के लिये विकास यात्रा पर निकले हुए हैं ।


इस बारे में पूछे जाने पर रमन सिंह ने ‘‘भाषा’’ से कहा कि पत्थलगड़ी का कोई विरोध नहीं है, विरोध उन ताक़तों का है जो पत्थलगड़ी के नाम से विभाजन रेखा खींचना चाहती हैं । उन्होंने कहा कि अगर कुछ अंकित करना ही है तब संविधान के दायरे में रहकर शहीदों की याद में चिन्ह स्थापित करें।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने क्षेत्र में आदिवासियों के कल्याण के लिये विकास कार्यक्रमों को प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया है, ऐसे में प्रदेश में ‘‘ पत्थलगड़ी’ नहीं ‘विकासगड़ी ’’ ही लोगों को सशक्त बना सकता है। रमन सिंह ने कहा कि इलाके के लोग विकास के महत्व को समझ रहे हैं ।

पत्थलगड़ी अभियान के तहत आदिवासी अपने संदेश को पत्थर पर लिखकर गांव की सीमा के पास गाड़ देते हैं। इस पर लिखा होता है कि ऐसे कोई भी बाहरी ‘‘लोगों’’ का गांव में आना जाना, घूमना फिरना वर्जित है, जिनके गांव में आने से यहां की शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका हो।इसके कारण सरकारी योजनाओं को लागू करने में समस्याएं पेश आने तथा सरकारी अधिकारियों के कामकाज में बाधा उत्पन्न होने की खबरें आई हैं। 
 

(दीपक रंजन)

छत्तीसगढ़ में पत्थलगड़ी बनाम विकासगड़ी

पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा परिहार ने फिर से हथियार उठाने की चेतावनी दी है। दरअसल सीमा परिहार ने अपने फेसबुक पेज पर लंबी-चौड़ी पोस्ट लिखकर अपने भाई को पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी है। सीमा परिहार ने पोस्ट में लिखा है कि उनके छोटे भाई रामबीर परिहार को कानपुर देहात एसआईटी और दिबियपुर थाना पुलिस ने उनके भाई को रात में घर से पकड़ लिया और अपने साथ ले गए। सीमा परिहार ने आशंका जाहिर की है कि उनके भाई को पुलिस किसी बड़े केस में फंसाना चाह रही है। 


सीमा परिहार के पोस्ट में उनके भाई रामकुमार परिहार का भी ज़िक्र किया गया है। पोस्ट में कहा गया है कि 2004 में रामकुमार परिहार को भी गाजियाबाद एसटीएफ और दिबियपुर थानाध्यक्ष ने कुछ गद्दारों के साथ मिलकर, विजयनगर में झूठी कहानी बनाकर एनकाउंटर कर दिया था। पोस्ट की आखिरी लाइनों में यह लिखा गया है कि सरकारी लोगं की वजह से सीमा परिहार की ज़िंदगी फिर से जंगल की तरफ जा रही है। अगर उनके भाई रामबीर को कुछ भी हुआ तो वो फिर से मजबूर होकर हथियार न उठा लें और ऐसा हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार होगी। सबसे आखिर में सीमा परिहार ने उनकी पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करने की अपील की है