दर्जनों परिवार अभी भी खुले आसमान के नीचे जीने को हैं मजबूर

दर्जनों परिवार अभी भी खुले आसमान के नीचे जीने को हैं मजबूर

महोबा। शासन की जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्रों तक नही पहुंच पा रहा है। आज भी अनेक पात्र ऐसे है जो खुले  आसमान के नीचे जीवन यापन कर रहे है और हाड़, तोड़ मेहनत मजदूरी कर खुले आसमान के नीचे डेरा डाल भोजन, तैयार कर अपने पेट की आग शान्त कर रहे है। इन परिवारों पर न तो किसी जन प्रतिनिधि की नजर पड़ती है और न ही अधिकारी, कर्मचारियों की। 

बताते चले शासन द्वारा गरीबों के लिये विभिन्न कल्याणकारी योजनायें चलायी जा रही है। जिससे कोई भी गरीब भूखा न रह सके।  लेकिन जिले सहित मुख्यालय में अनेक ऐसे  परिवार है जो आज भी मुफलिसी में जीवन यापन करने को मजबूर हो रहे है। गरीबों के लिये लोहिया आवास बनाकर दिये जा रहे है लेकिन पात्र आज भी खुले आसमान के नीचे अपने परिवार सहित जीवन यापन कर रहे है। इतना ही नही खुले में ही यह  हाड़ तोड़ मेहनत के बाद जो थोड़ा बहुत पैसा मिलता है उससे राशन सामग्री लाकर भोजन तैयार करते है और फिर अपने पेट की आग शान्त करते है। नेता व जनप्रतिनिधि गरीबो की मदद करने की बाते तो बड़ी, बड़ी करते है लेकिन यह तस्वीर इस बात का प्रमाण है कि नेताओं की बातों और वादों में कितनी सच्चाई है। बताते चले मुख्यालय में अनेक ऐसे परिवार है जो रोज, खाने कमाने वाले है और उनके पास न तो आवास है और न ही उन्हें कोई योजना का लाभ मिल रहा है। जिससे वह शासन की योजनाओं से वंचित तो हो ही रहे है और मुफलिसी में जीवन यापन करने को मजबूर हो रहे है।