हमें जान से प्यारी है जन्मभूमि, एक बार आप भी आइए नॉर्थ ईस्ट

हमें जान से प्यारी है जन्मभूमि, एक बार आप भी आइए नॉर्थ ईस्ट

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मॉनसून की दस्तक के साथ नॉर्थ ईस्ट की को डर लगता है।

डर खूबसूरत नदियों के सैलाब में बदल जाने का होता है। डर आसमान को नापने पहाड़ें के बिखर जाने का होता है। डर सजी संवरी प्यारी सी धरती के उग्र हो जाने का होता है। डर तो लगता है लेकिन कहां गया है न कि मां और जन्मभूमि स्वर्ग से भी प्यारी होती है। यही वजह है कि इस डर से भी हमें प्यार है। हम अपने पूर्वोत्तर से मोहब्बत करते हैं। ये हमारा पहला प्यार है जो ब्रह्मपुत्र की पावन धारा की तरह बिना रुके बह रहा है और हमेशा बहता रहेगा। 

आप लोगों से बस यही कहना है कि एक बार आइए हमारी धरती पर। हम मिलें न मिले, प्रकृति आपका इतना शानदार स्वागत करेगी की आप जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।