गंगा दशहरा का आध्यात्मिक,वैज्ञानिक एवं राजनैतिक दृष्टांत

गंगा दशहरा का आध्यात्मिक,वैज्ञानिक एवं राजनैतिक दृष्टांत

अभय अवस्थी की कलम से 


दसतपा,,,और गंगा दशहरा...
एवं डम्प्लॉट सरकारी रेलमपेल,,
"आध्यात्मिक,वैज्ञानिक एवं राजनैतिक दृष्टांत.."

(1) धर्मशास्त्र की मान्यता है,
महाराज भगीरथ ने अभूतपूर्व तप करके, भष्मावशेष अपने पुरखों को तारने हेतु माँ गंगा को पृथ्वी पर आने को राजी कर लिया..
और वे सब तर गये..

(2) वैज्ञानिक आधार देखिये,,
दसतपा काल के प्रथम दिवस से, मैदानी इलाकों में 45-50℃ के धधकते लू के थपेड़ो से हिमालय के शिखरों पर स्थित अनेक ग्लेशियर पिघल उठते हैं..जो ऊंचे पहाड़ो से बहते बहते @दस दिनों का सफर तै करते हुये हजार से जादा किमी. बाद बंगाल की खाड़ी गंगा सागर तक पवित्र जल धारा को सतत प्रवाहित कर भीषण गर्मी और शुष्की से सूख रही गंगा और उसके उपजाऊ तट को पुनः संतृप्त कर देती है, 
और वे सारे तट, पुनः तर जाते है...

(3) अब आज की राजनैतिक धुरपटासी भी समझ लें..
माँ गंगा,,के नाम पर, आज के नेता और गंगा मां की कृपांकांक्षी समस्त सरकारी विभाग,,के नीति निर्धारण में जुटे लोगों ने पाया कि अरे, माई गंगा तो हमारी
धनलोलुपता में भटकती आत्मा को तारने हेतु धरती पर बह रहीं हैं..और इसको खतरे में बताओ, प्रदूषित बताओ, जहरीली बताओ, तो बड़ा भारी धनकोष गला कर अपनी कई पीढ़ी को तार भी सकते है..
आज उसके तट पर आने वाला स्नानार्थी, कृषक भले ना तर पा रहा हो..
पर सरकार, नेता, अधिकारी, ठेकेदार, मैटीरियल सप्लायर, विज्ञापन के माध्यम से मीडियाई वर्ल्ड,
सबके सब इस महाअभियान में धनबुड़की मार-मार अपनी तीन पीढ़ी तक को चंगा कर रहे हैं...
और,,
"माई गंगे, 
मोहे भी तार दे गंगे" वाला भजन 
अनूप जलोटा के बाप पुरुषोत्तम दास जलोटा की आवाज में गाये पड़े है...
और सबको खुद पुनर्जीवित करने वाली गंगा को बचाने हेतु "कैंडल मार्च" तक रेल दे रहे हैं..

खैर, आप सभी को गंगा दशहरा की बधाई..