2019 तैयारी चुनाव की ! बाते जो जीत के लिए रखे ध्यान में !

2019  तैयारी चुनाव की !  बाते जो जीत के लिए  रखे ध्यान में !

 

अक्सर चुनावो के परिणाम के बाद ये चर्चा होती है की हमने तो सब कुछ बेहतर किया था या फिर हमारे साथ जनता थी या फिर हम तो चुनाव जीतने वाले थे पर हम चुनाव हार गए ! आखिर ऐसा क्या हुआ जो हम नहीं समझ पाए और चुनाव के पहले तक जो चुनावी परिस्थिति हमें अपने पक्ष में लगती थी वो कैसे हमारे खिलाफ चली गई  ?

चुनाव ही दुनिया  की  वो एकमात्र सबसे बड़ी  घटना  होती है जिसे मात्र मनोवैज्ञानिक या फिर मनोदैहिक मापदंडो पर लड़ा  जाता है ! चुनाव में मुख्य उद्देश्य जनता या फिर जनसमूह को मनोवैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित करते हुए  उन्हें अपने पक्ष में करने की होती है ! मात्र राजनैतिक इवेंट ( रैली,यात्रा इत्यादि ) कर देने से यह निश्चित नहीं होता है कि जनसमूह आपके पक्ष में हो गया है ! साथ ही चुनाव ही एक मात्र ऐसी घटना है जो केवल और केवल मानव के सामाजिक और राजनैतिक व्यवहार पर आलम्बित होती है और जनसमूह का व्यहार सबसे अबूझ  पहेली है जिसके बारे में सबसे कम अध्ययन    किया गया  है या फिर जिसको अभी तक बहुत कम समझा गया  है ! 

आइये यहाँ उन छोटी छोटी बातो  की चर्चा करते है जो आपको आगामी चुनाव में माहौल को अपने पक्ष में करने में बहुत सहायक होगी !

१) चुनाव सबसे से अनिश्चित विषय है ! अतः चुनाव का प्रबंधन भी दुनिया में सबसे कठिन कामो में से एक होता है विशेषकर भारत जैसे विविधता से भरे हुए देश में  ! चुनाव प्रबंधन   अनिश्चितता का प्रबंधन  है ! अपनी इसी अनिश्चितता कि प्रकृति की कारण ही बहुत ही अनुभवी नेता या पार्टी भी चुनाव हार जाते है ! अतः इसे गंभीरता से लेना चाहिए भले ही आप कितने अनुभवी और सर्व गुण संपन्न  नेता क्यों न हो ! ध्यान  रहे कि चुनाव  सिर्फ पांच साल में एक बार आता है ! हार गए तो दूसरा मौका पांच साल बाद ही मिलेगा !

२) हारने की स्थिति में ये सिर्फ हार ही नहीं होती है, बल्कि अप्रतक्ष्य रूप में आपको काफी नुकासन होता है ! जैसे की आपका, कार्यकर्ताओ और आपके मतदाताओं  का मनोबल टूटना और आपकी छवि  आगे के लिए हारे हुए उम्मीदवार  के रूप स्थापित होना !

३) पुनः अपने आपको  को जीतने वाले उम्मीदवार के रूप में स्थापित करना बड़ा मुश्किल  काम होता है ! जनसमूह  को  ये पुनः विश्वाश दिलाना काफी कठिन होता है कि हारने के  बावजूद  भी आप क्यों एक बेहतर उम्मीदवार है ? जनसमूह की मानसिकता को अपने पक्ष में करना काफी मुशिकल होता है !

४) ज्यादातर हार छोटे छोटे  कारणो से  होती है या फिर उन चीजों के कारण जिन्हे आप अनदेखा कर देते है !  

५) चुनाव पारितंत्र सबसे गतिमान पारितंत्र होता है ! यहाँ परिवर्तन बहुत तेजी से होता है ! अतः आपका पूरा चुनावी प्रबंधन भी इसी माहौल के हिसाब से  गतिशील और तुरंत क्रिया - प्रतिक्रिया देने में सक्षम  होना चाहिए ! 

६) ध्यान रहे की चुनावी  जीत का सबसे प्रमुख पहलू  "रणनीति" होती है न की "सोशल मीडिया का प्रबंधन " मात्र  इत्यादि  ! जीत "सोशल स्ट्रेटेजी" से होती है ! सोशल मीडिया इत्यादि का प्रयोग तभी सफल होता है जब आपकी रणनीति सफल है ! मात्र सोशल मीडिया पर  कुछ भी लिख देने या बोल देने,या कोई भी कैंपेन चला देने मात्र  से उसका अपेक्षित परिणाम नहीं आता ! अतः सही रणनीति सबसे पहले बनाये ! सोशल मीडिया ,बल्क मैसेज ,ईमेल, वीडियो इत्यादि कंट्रोल्ड तकनिकी है और इन्हे कोई भी प्रयोग कर सकता है ! सारी चुनौती, चुनावी पारितंत्र को समझते हुए सही रणनीति बनाकर पूरे चुनावी पारितंत्र को उचित तरके से अपने पक्ष में  मैनेज करने की होती है ! पूरे चुनावी पारितंत्र और उसके डायनामिक्स  पर अपना अधिपत्य बनाकर  रखना ही एक कुशल रणनीतिकार का अंतिम  लक्ष्य या फिर उद्देश्य होता है ! तभी अपेक्षित मतदाता आपसे प्रभावित  होकर आपकी तरफ झुकते है !

७) चुनाव एक नितांत सामाजिक और राजनैतिक प्रक्रिया है जिसमे की मानव / मतदाता  और उसका व्यहार ही सबसे महत्वपूर्ण घटक है ! अतः जो भी रणनीति बनाये मतदाताओं के व्यग्तिगत व्यवहार ,समूह का व्यवहार ,अपने विरोधी  और पूरे राजनैतिक डायनामिक्स को ध्यान में रख कर बनाये ! अपने आप में चुनावी प्रबंधन एक बहुत की क्लिष्ट और इंटीग्रेटेड प्रक्रिया होती है ! किसी भी चीज को अनदेखा न करे और उसके तह तक माइक्रो लेवल पर जाये !

७) राजनीती में पोलिटिकल इलुशन और पोलिटिकल मायोपिया से बच कर  रहे ! यह एक ऐसा भ्रामक तथ्य है कि हर पार्टी, हर उम्मीदवार अपने आपको जीता हुआ देखता है और हर मतदाता जिससे आप वोट मांगने जाते है वो भी आपको ही वोट देना का वादा करता है जबकि ऐसा ही  होगा, ये निश्चित  नहीं है !

८) इस भ्रामक चुनावी पारितंत्र में सही तथ्यों को समझना ही जीत सुनिश्चित कर सकता है अतः उन चीजों पर ध्यान दे जो सामने से आपको नहीं दीखता है,  यानि कि लेटेंट पोलिटिकल डायनामिक्स पर ध्यान दे कि कैसे घटनाये  एक दूसरे को प्रभावित  करती है ! क्या करे कि मतदाताओं का समूह दूसरे उम्मीदवार को छोड़कर आपसे जुड़े ! ध्यान रहे कि समूह गतिकीय ( ग्रुप डायनामिक्स ) कि  एक विशेष भूमिका चुनावो में होती है !

९) अगर आप हारे हुए प्रत्याशी है तो चुनौती इस चीज की है की कैसे जरुरत के मुताबिक अपेक्षित मतदाता की संख्या को अपने पक्ष में करे और अगर आप जीते हुए प्रत्याशी है तो आपके सामने  चुनौती ये रहती है की कैसे आप अपने मतदाताओं   को अपने पक्ष में कर के रखे  ! ध्यान रहे की मतदाताओं का आपसे जुड़ना या जुड़े रहना एक मानव व्यहार का विषय है और मतदाता / मतदाताओं  की मनोस्थिति को बदलना एक मुश्किल  काम है जिसमे समय लगता है !

१०) मतदाताओं की मनोस्थिति को बदलने के लिए लगातार चरणबद्ध तरीके से काम करने की जरुरत होती है क्योकि ये धीरे धीरे होने वाली प्रक्रिया है ! किसी को कन्विंस करना और अपने  पक्ष में करना मुश्किल  काम होता है !

११) जनसमूह की मनोस्थिति को  बदलना एक लम्बी प्रक्रिया है ! अतः अभी से काम करना शुरू करे ! ध्यान रखे की दुनिया में कोई भी राजनैतिक परिवर्तन मात्र एक महीने के काम से नहीं हुआ है ! इसके लिए सतत प्रयत्नशील रहना पड़ता है !

१२ ) अभी से अपनी सारी  व्यवस्था बना ले,ग्राउंड लेवल रिसर्च कर ले ,वार रूम ,टीम को बनाना उनकी जिम्मेदारियों को बाटना और वो सही तरीके से काम करे इसके लिए लगातार उनको  प्रशिक्षण देना अनिवार्य है ! ताकि इलेक्शन कैंपेन के समय आपको अव्यस्था का सामना न करना पड़े !

१३)  सारी व्यवस्था और  सुविधा होने के वावजूद सफलता इस चीज पर निर्भर करती है की आप "टूल और टेक्निक्स" का धरातल पर कितनी दक्षता से प्रयोग करते है ! अतः आपका एक्सेक्यूशन का  प्रोसेस सटीक हो और सटीक समय पर हो इस बात का विशेष  ध्यान रखे !

१४) इलेक्शन कैंपेन का उद्देश्य लक्ष्यित जनसमूह को अपने पक्ष में करना होता है ! ध्यान रहे की मात्र कोई पोलिटिकल इवेंट ( जैसे की धरना प्रदर्शन रैली इत्यादि ) कर देने से ये लक्ष्य प्राप्त हो जाये जरुरी नहीं ! अगर जनसम्मोह की मनोस्थिति समजे बिना आप कोई इवेंट करते है तो उसका परिणाम आपके लिए नेगटिव भी जा सकता है ! अतः चुनाव को मात्र एक राजनैतिक  इवेंट मैनेजमेंट की तरह न ले ! 

१५) भीड़ का इक्कठा होने का मतलब आपकी जीत नहीं है ! चुनौती ये होती है की आपकी भीड़, आपके वोट में कन्वर्ट हुई की नहीं ! लगभग सभी दलों के चुनावी रैलियो में भीड़ इकठ्ठा होती है परन्तु जीत उसी की होती है जो इस भीड़ को वोट में कन्वर्ट कर पाता है ! 

16) अंत में ध्यान रखे की चुनाव में परिणाम सिर्फ एक ही होता है या तो आप जीतेंगे या फिर हारेंगे ! १ वोट से हार भी आपके सारी मेहनत पर पानी फेर सकता है अतः जरा सी भी चूक की गुंजाइश न रखे नहीं तो दोबारा मौका ५ साल बाद  ही मिलेगा !