2019 - चुनौती चुनाव की !

2019 - चुनौती चुनाव की !

2019 के आम चुनावो में उम्मीदवारों और बिबिन्ह राजनैतिक पार्टियों के सामने आने वाली स्ट्रेटेजिक चुनौतियों की चर्चा कर रहे है !

राजनैतिक दलों,उम्मीदवारों और यहाँ तक कि  मतदाताओं के लिए भी २०१९ के चुनाव किसी  चुनौती से कम नहीं होने वाले है ! इसी कारन सत्ता पक्ष के साथ साथ विपक्ष और यहाँ तक कि गली और सड़को पैर अभी से २०१९ के चुनावो कि चर्चा सुरु हो गई है ! राजनैतिक दलों,उम्मीदवारों ने भी अभी से अपनी तैयारी शुरू भी कर दी है ! हो भी क्यों न जब आगामी २०१९ के चुनाव अभी तक हुए सभी चुनावो में  सबसे ज्यादा क्लिष्ट होने जा रहे हो ! ऐसा हम इसलिए कह रहे है क्योकि २०१९ एक ऐसा चुनाव होने जा रहा है जहा आधुनिक संचार संसाधनों का सबसे ज्यादा और उन्नत तरीके से प्रयोग सभी के द्वारा किया जायेगा ! आइये देखते है कि राजनैतिक पार्टियों, उमीदवारो और मतदाताओं के लिहाज से क्या क्या चुनौतियां २०१९ के चुनावो में आने वाली है -

बात अगर राजनैतिक पार्टियों कि कि जाये तो सबसे महत्वपूर्ण चुनौती सत्तारूढ़ पार्टी बी जे पी को ही है ! जहा बी जे पी के सामने पुनः सर्कार बनाने कि होगी उससे भी बड़ी चुनौती बी जे पी के सामने अपने द्वारा निर्धारित लक्ष्यों और विपक्ष को एक बार फिर से क्लीन स्वीप करने कि होगी ! अगर ऐसा नहीं हुआ या फिर बी जे पी कि जीत सधारद जीत होती है या फिर अस्पस्ट बहुमत में बी जे पी जोड़ तोड़ से सर्कार बनती है तो ये माना जायेगा कि मोदी लहर कमजोर हो गई है और बी जे पी ने मतदाताओं के मन में जो उम्मीदे २०१४ में जगाई थी मतदाताओं ने उसपर इनके ५ साल के कार्यकाल के बाद भी मुहर नहीं लगाई यानि कि बी जे पी  सरकार अपने "वादे, इरादे, और कर के दिखा दे " के सिद्धांत पैर खरी नहीं उतर पाई ! 

विपक्ष के सामने सब बड़ी चुनौती इस बात कि होगी कि आज कि समाया में बी जे पी जैसे सुसंगठित राजनैतिक दाल का सामना कैसे किया जाये ? क्या विपक्ष एकजुट हो पायेगा ? क्या सारे विपक्षी दल एकजुट हो कर एक मुद्दे पर बी जे पी के साथ लड़ने को तैयार ही पाएंगे ? वैसे देखा जाये तो अभी विपक्ष तीतर बितर है ! और विपक्ष में आम सहमति  नहीं बन पाई है ! निस्चय ही विपक्ष अगर अलग अलग लड़ता है तो बी जे पी उनके सामने काफी मजबूत पार्टी रहेगी  और जनता के सामने फिर एक बार बी जे पी से केंद्र में सबसे दमदार विकल्प होगी सरकार बनाने के लिए !

कुछ इसी तरह की उहापोह उम्मीदवारो के साथ भी रहेगी ! चाहे बी जे पी हो या फिर और कोई पार्टी के उम्मीदवार,इस बार उम्मीदवारो को व्यक्तिगत रूप से अभी से काफी मेनहत करनी होगी ! मात्रा पार्टी कि लहर के सहारे जीत कि उम्मीद तो शयद ही कोई उम्मीदवार लगा के बैठा हो ! कम से कम बदलते हुए माहौल में सभी उम्मीदवारों ने इस चीज को भाप भी लिया है और इसकी वो तैयारी भी कर रहे है !

 ५ साल के शाशन में कोई भी पार्टी आदर्श रूप में अपने "वादे इरादे और कर के दिखा दे" के सिद्धांत पर  शाट प्रतिशत सफल नहीं हो पाती है ! इसके कुछ नैसर्गिक कारण भी होते है ! मतदाताओं के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती इस बात की होगी किस पार्टी को आदर्श रूप में स्वीकार करे और किस पार्टी को नैसर्गिक मजबूरी के रूप में ? मतदाताओं का झुकाव ये बताएगा की क्या मतदाता आदर्श मुद्दों पर झुकते है या फिर उनसे हैट के पुराने चुनावी समीकरण जैसे की जाति पात क्षेत्रीयता  आदि मुद्दों पर ! कुल मिलकर मतदाताओं के लिए ये निरयण लेना ही सबसे बड़ी चुनौती होगी किसे वो वोट दे और स्पस्ट बहुमत की सरकार बनाये या फिर  अस्पष्ट जनादेश दे !

इन सबसे ऊपर चुनौती एक चीज की और भी होगी और वो है की चुनावो और राजनीती के कुशल प्रबंधन की ! २०१९ में सोशल मीडिया , इवेंट मैनेजमेंट इत्यादि किसी एक पार्टी की रडनीति मात्रा नहीं रह जाएगी बल्कि असली मुद्दा तो स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट का होगा क्योकि आज सभी पार्टियों ने सोशल मीडिया इत्यादि के लिए पूरी कमर कास ली है जबकि २०१४ के चुनावो में बी जे पी इसमें काफी आगे थी !

देखा जाये तो २०१९ के चुनाव स्ट्रेटेजिक तरीके से बिलकुल ही नए होने वाले है ! जहा एक तरफ साडी पार्टिया मीडिया बोम्बार्डिंग को छोड़कर  रडनीतिक पहलु पर ज्यादा ध्यान देगी वही व्यक्तिगत तौर पर उम्मीदवार भी अपनी  तरफ से रडनीतिक रूप से काम करेंगे न की मात्र पार्टी की लहर के भरोसे बैठे रहेंगे ! ठीक इसी तरह मतदाताओं के सामने स्पष्ट बहुमत देने की चुनौती रहेगी ! चुनाव भले ही अभी दूर हो पर २०१९ के चुनावी चुनौतियों से निपटने की तैयारी सभी ने अभी से शुरू कर दी है !